इस कीमत में क्या मिलता है
- 15 सोलर पैनल (550 वॉट के, भारत में बने)
- 8 kW इन्वर्टर, जो सोलर बिजली को घर की बिजली में बदलता है
- स्टील का स्टैंड जो छत पर पैनल को थामता है
- वायरिंग, सुरक्षा स्विच और अर्थिंग
- इंस्टॉलेशन. दो-तरफ़ा मीटर (नेट मीटर) बिजली कंपनी देती है, आमतौर पर थोड़े शुल्क पर।
कीमतें अलग क्यों होती हैं
- ब्रांड: अदाणी, वारी, टाटा पावर सोलर आदि की कीमतों में लगभग 5–15% का फ़र्क होता है।
- स्टैंड की ऊँचाई: ऊँचा स्टैंड (ताकि नीचे छत इस्तेमाल हो सके) महँगा पड़ता है।
- बैटरी: बैटरी वाला सिस्टम काफ़ी महँगा है और उस पर सब्सिडी नहीं मिलती।
सोलर से पैसे कैसे बचते हैं: दो उदाहरण
घर में इस्तेमाल हुई हर सोलर यूनिट, बिजली कंपनी से खरीदी जाने वाली एक यूनिट की जगह लेती है। बची हुई यूनिट ग्रिड में जाती हैं और उन पर कम पैसा मिलता है। ₹7 प्रति यूनिट पर उदाहरण:
| खपत 700, सोलर 600 | खपत 600, सोलर 700 | |
|---|---|---|
| घर में इस्तेमाल सोलर यूनिट | 600 | 600 |
| कंपनी से खरीदी यूनिट | 100 | 0 |
| ग्रिड को बेची अतिरिक्त यूनिट | 0 | 100 × ₹3 |
| बिल पहले → बाद में | ₹4,900 → ₹700 | ₹4,200 → ₹0 |
| हर महीने बचत | ₹4,200 | ₹4,450 |
दूसरा सिस्टम 100 यूनिट ज़्यादा बनाता है, पर बचत सिर्फ़ ₹250 ज़्यादा होती है। उतना ही बड़ा सिस्टम लें जितनी आपकी खपत है।
आपके लिए कौन-सा साइज़ सही है?
अपना मासिक बिजली बिल देखें और सबसे पास वाली पंक्ति चुनें।
| सोलर साइज़ | इतने मासिक बिल के लिए | आप देंगे (सब्सिडी के बाद) | रोज़ की यूनिट |
|---|---|---|---|
| 1 kW | ₹800 | ₹30,000 से ₹50,000 | 4 |
| 2 kW | ₹1,700 | ₹60,000 से ₹90,000 | 8 |
| 3 kW | ₹2,500 | ₹87,000 से ₹1.32 लाख | 12 |
| 4 kW | ₹3,400 | ₹1.37 लाख से ₹1.92 लाख | 16 |
| 5 kW | ₹4,200 | ₹1.82 लाख से ₹2.52 लाख | 20 |
| 6 kW | ₹5,100 | ₹2.32 लाख से ₹3.12 लाख | 24 |
| 8 kW | ₹6,800 | ₹3.22 लाख से ₹4.22 लाख | 32 |
| 10 kW | ₹8,500 | ₹4.02 लाख से ₹5.22 लाख | 40 |
पूरा सिस्टम लगवाने की सामान्य कीमत। खरीदने से पहले 2–3 कोटेशन ज़रूर लें।
ये शब्द आपको दिखेंगे
- kW (किलोवाट)
- सोलर सिस्टम का साइज़। ज़्यादा kW = ज़्यादा पैनल = ज़्यादा बिजली।
- यूनिट
- बिजली बिल की एक यूनिट (1 kWh)। एक पंखा पूरे दिन चले तो लगभग 1.5 यूनिट खर्च होती है।
- सब्सिडी
- पीएम सूर्य घर योजना में सरकार सिस्टम लगने के बाद यह पैसा आपके खाते में वापस देती है।
- ऑन-ग्रिड
- बिना बैटरी, बिजली लाइन से जुड़ा सोलर। सब्सिडी केवल ऑन-ग्रिड सिस्टम पर मिलती है।
- नेट मीटर
- दो-तरफ़ा मीटर। यह लाइन से ली गई और पैनल से लाइन में भेजी गई, दोनों यूनिट गिनता है।
- DCR पैनल
- भारतीय सेल से बने पैनल। सब्सिडी के लिए ज़रूरी हैं; इंस्टॉलर यही लगाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में भारत में 8kW सोलर सिस्टम की कीमत क्या है?
पूरा 8kW रूफ़टॉप सिस्टम लगवाने में ₹4 लाख से ₹5 लाख लगते हैं। ₹78,000 की सरकारी सब्सिडी के बाद आप ₹3.22 लाख से ₹4.22 लाख देते हैं।
सब्सिडी के साथ 8kW सोलर सिस्टम की कीमत कितनी है?
₹3.22 लाख से ₹4.22 लाख। सिस्टम लगने के बाद सरकार ₹78,000 आपके बैंक खाते में वापस देती है (₹78,000 अधिकतम है, 3 kW और उससे ऊपर के लिए)।
8kW सोलर सिस्टम रोज़ कितनी यूनिट बनाता है?
रोज़ लगभग 32 यूनिट (शहर के हिसाब से 26 से 36)। यानी महीने में लगभग 967 यूनिट। अपना शहर देखें।
8kW के लिए कितने पैनल चाहिए?
550 वॉट के 15 पैनल। छोटे पैनल लगें तो कुछ ज़्यादा चाहिए।
8kW सोलर के लिए कितनी छत चाहिए?
लगभग 800 वर्ग फ़ुट खुली छत, जहाँ छाया न हो।
क्या 8kW मेरे घर के लिए काफ़ी है?
8kW उस घर के लिए सही है जिसका मासिक बिल लगभग ₹6,800 (970 यूनिट) है। बिल कम हो तो छोटा सिस्टम लें: ग्रिड को बेची गई अतिरिक्त यूनिट पर बहुत कम पैसा मिलता है।
क्या 8kW सोलर से AC चल सकता है?
हाँ। 8kW रोज़ लगभग 32 यूनिट बनाता है, जो 1.5 टन इन्वर्टर AC को रोज़ लगभग 24 घंटे चलाने के बराबर है। AC सामान्य रूप से चलता है और बिल कम हो जाता है।